Kids story with moral in hindi l जादुई चक्की की कहानी

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Kids story with moral in hindi जादुई चक्की की कहानी


Kids story with moral in hindi
Kids story with morals in hindi





 एक गांव में दो भाई बंसीलाल और मुरारीलाल रहते थे दोनों में काफी झगड़ा हुआ करता था मुरारीलाल काफी अमीर तथा बंसीलाल बहुत गरीब था मुरारी लाल अमीर होने के कारण उसका स्वभाव काफी कठोर था हर वह अपने भाई से नफरत करता था।

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 बंसीलाल बहुत गरीब था इसी कारण उसके पास ना तो खाने के लिए अन्न थे और ना ही पहनने के लिए ढंग से कपड़े थे


एक दिन उसका परिवार भूख से तड़प रहा था तभी बंसी लाल मदद मांगने के लिए अपने भाई मुरारीलाल के पास गया। लेकिन मुरारी लाल अपने कठोर वाणी का प्रयोग करके बंसीलाल को अपने घर से भगा दिया। बंसीलाल काफी उदास था ।


तभी  सामने एक बूढ़ा व्यक्ति जो कि लकड़ी के गड्ढे को नहीं उठा पा रहा था। यह देख कर वह बूढ़ा व्यक्ति के पास गया और उसकी मदद करने लगा। लेकिन उसके चेहरे में उदासी साफ तौर पर दिख रही थी यह देख कर बूढ़ा व्यक्ति पूछने लगा बेटा इतना उदास क्यों हो? तो बंसीलाल ने अपने गरीबी परिस्थिति के बारे में बताया।


तो बूढ़े व्यक्ति ने कहा बेटा अगर तुम यह लकड़ी का गट्ठा मेरे घर तक ले जाने में मदद करते हो तो मेरे  पास एक उपाय है जिससे तुम अपने परिवार की पूर्ति कर सकते हो। उसकी बात सुनकर बंसीलाल लकड़ी के गड्ढे को उनके घर तक पहुंचाने में मदद करता है।(kids story with moral in hindi)


उसके बदले में बुड्ढा व्यक्ति बंसीलाल को एक मीठी रोटी देता है। और कहता हैं - बेटा जंगल में 3 आम के पेड़ के पीछे ऊंचाई में एक झोपड़ी है वहां तीन बौने रहते हैं यह रोटी उन्हीं बौने  को देना उन्हें बहुत पसंद है और बदले में पत्थर की एक चक्की देंगे ।


बूढ़े आदमी की बात सुनकर बंसीलाल जंगल की तरफ आगे बढ़ने लगता है रास्ते में 3 आम के पेड़ होते हैं जिसमें ताजे फल पके होते हैं जिन्हें देखकर बंसीलाल की भूख बढ़ जाती है लेकिन बंसीलाल उन फलों को नहीं खाता और झोपड़ी की ओर आगे बढ़ता है।


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जब बंसीलाल झोपड़ी में पहुंचता है तो वहां बूढ़े व्यक्ति के कहे अनुसार तीन बौने होते हैं बंसीलाल उस रोटी को बौनो को देकर उसके बदले पत्थर की चक्की मानता है। वह चक्की जादुई चक्की थी चक्की को घुमाने से इच्छा अनुसार कोई भी वस्तु प्राप्त किया जा सकता था और जरूरत पूरा होने पर उसे लाल कपड़े से ढक देने पर वह चक्की बंद हो जाता था।


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बंसीलाल उस पत्थर की चक्की को घर ले जाता और सबसे पहले उस चक्की से दाल और चावल निकलता है उस दिन उसका पूरा परिवार पूरा पेट भर खाना खाते हैं। धीरे-धीरे करके बंसीलाल अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति करने लगता है और कुछ वस्तुएं बाजार में बेचने लगता है कुछ दिन पश्चात वह अपना खुद का बड़ा सा घर बना लेते हैं ।


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बंसीलाल पूरी तरह से अमीर बन चुका था। यह देख कर उसका भाई मुरारी लाल सोचने लगता है कुछ दिन पहले ही यह बहुत गरीब था और आज इतना अमीर हो गया कुछ तो गड़बड़ है ऐसा सोच कर मुरारी लाल एक दिन चुपके से उसके घर के अंदर घुस जाता है और वे जादुई चक्की के बारे में जान जाता है।

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और चक्की को लेकर अपने परिवार के साथ गांव छोड़ देता है और नाव से समुद्र पार करने लगता है वह उस नाव में ही उस चक्की से नमक मांगता है और चक्की को घुमा देता है अब उस चक्की से नमक निकलने लगता है और उसे चक्की को बंद करने का उपाय पता नहीं होने के कारण चक्की से नमक निकलते जाता है नमक इतना ज्यादा निकलता है कि नाव डूब जाती है और उसके पूरे परिवार डूब कर मर जाते हैं।


माना जाता है कि यह चक्की अभी तक घूम रही है और चक्की से नमक निकलते जा रहा है जिसके कारण समुद्र का पानी खरा है।


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आशा है दोस्तों आपको जादुई चक्की की कहानी - kids story with morals पसंद आया होगा।

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                 धन्यवाद
                 जय हिंद

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